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Wayanad Disaster : केरल सरकार ने दिया वैज्ञानिकों को न बोलने का आदेश, विरोध के बाद वापस

-      वायनाड में भूस्खलन से अब तक हो चुकी है तीन सौ लोगों की मौत

केरल की वामपंथी सरकार ने अपनी गलतियों को छिपाने के लिए एक फरमान जारी किया है जिसमें कहा गया है कि कोई भी वैज्ञानिक या भूस्खलन मामलों का जानकार वायनाड के घटना स्थल पर न जाए। साथ ही इस आदेश में यहा तक निर्देश दिया गया है कि इस मामले को लेकर किसी भी प्रकार का विचार भी कही व्यक्त न करे। आपको बता दें कि केरल राज्य के वायनाड में भूस्खलन से अब तक तीन सौ से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार केरल सरकार द्वारा जारी निर्देश में सभी विज्ञान संस्थानों को निर्देश दिया गया है कि वह मेप्पडी पंचायत, वायनाड का दौरा न करें, और न ही अपने इस मामले में किये गये अध्ययन पर कोई रिपोर्ट मीडिया से भी साझा न करें। केरस सरकार ने ये आदेश तब जारी किया है जब उसकी पोल खुल गयी है।

सरकार को दी गयी थी भूस्खलन की चेतावनी

इस मामले में राज्य के कई वैज्ञानिक संस्थाओं ने खुलासा किया है कि वायनाड जिला प्रशासन को भूस्खलन सम्बन्धी चेतावनी भेजी गई थी। इसके बाद भी वायनाड जिला प्रशासन ने कोई एक्शन नहीं लिया और लगभग 300 लोग काल के गाल में समा गए। वायनाड में 200 से अधिक मौसम निगरानी यूनिट चलाने वाले ह्यूम सेंटर फॉर इकोलॉजी एंड वाइल्डलाइफ बायोलॉजी ने भूस्खलन से दो दिन पहले ही चेतावनी दी थी। इस रिपोर्ट में उन इलाकों में विशेष रूप से खतरा बताया गया था जहाँ यह आपदा आई।

ऑप इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार इस सेंटर के मुखिया CK विष्णुदास ने खुलासा किया था कि जिला प्रशासन को सोमवार को ही भूस्खलन की चेतावनी दे दी गई थी। उन्होंने यह भी बताया कि इन गाँवों से लोगों को निकालने की सलाह भी दी गई थी। हालाँकि, इस पर कोई एक्शन नहीं लिया गया और भूस्खलन की अंदेशा सच साबित हुआ।

यह जानकारी सामने आने के बाद केरल सरकार और वायनाड प्रशासन पर प्रश्न उठना शुरु हुए तो उसने वैज्ञानिकों का ही मुंह बंद करने वाला आदेश निकाल दिया। इससे वह अपनी किरकिरी से बचना चाहती है। केरल सरकार के इस आदेश का बड़े पैमाने पर विरोध हो रहा है।

भारी विरोध के बाद आदेश लिया वापस

भारी विरोध और लानत मलानत के बाद केरल की वामपंथी सरकार ने यह आदेश वापस ले लिया है। केरल के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन ने इस पर सफाई भी दी है। CM विजयन ने कहा कि ऐसी कोई नीति नहीं है जो वैज्ञानिकों को बोलने से रोके।

गौरतलब है कि 30 जुलाई, 2024 की रात को वायनाड के कई गाँवों में भारी बारिश के कारण भूस्खलन हुआ था। इस भूस्खलन के कारण 3-4 गाँव पूरी तरह बह गए थे। इनमें रहने वाले हजारों लोग यहाँ मलबे के बीच फंस गए। इस हादसे में अब तक लगभग 300 लोगों की जान जा चुकी है। सैकड़ों लोग घायल हैं, जिनका इलाज चल रहा है। सेना-वायुसेना और NDRF ने यहाँ हजारों लोगों को बचाया है। अब इन लोगों को फिर से बसाने को लेकर कवायद चल रही है।

 

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